Baccho ki Kahani

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Baccho ki Kahani

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बोलने वाली मूर्तीbolti murti Kahani HindiBaccho ki kahani

दूसरे राज्य का राजा हमेशा राजा महेश्वराय के राज्य को हराने के लिये षड्यंत्र बनाता था । लेकिन हमेशा असफल हो जाता था । क्योकि राजा महेश्वराय के राज्य मे एक खूब बुद्धिशाली मंत्री थे जिनका नाम बुद्धिराम था । मंत्री के कारण ही राज्य बचा था ।

एक दिन किसी दूसरे मंत्री ने कहा :- महाराज काले पर्वत पर साधू राजनाथ आये है जो बहुत बड़े तांत्रिक है और वो आपके लिये कुछ तोहफा भी लाये है ।  

राजा ने कहा :- आने दो उन्हे, मेरे दरबार मे उनका स्वागत है ।

(दूसरे दिन तांत्रिक को दरबार मे स्वागत किया गये । राजा महेश्वराय और मंत्री बुद्धिराम भी दरबार मे आ गये और राजा के बाजु मे खड़े हो गये )

राजनाथ :- महाराज मैं एक बोलने वाली मूर्ती भी लाया हु आप अनुमती दें तो मै दरबार मे पेश करूँ ।

राजा :- ठीक है आप बोलने वाली मूर्ती को दरबार मे पेश कर सकते हो ।

मूर्ती दरबार मे आया और कहने लगा ।

मुर्ती :- “प्रणाम महराज ”

( फिर बोला )

बोलने वाली मूर्ती की कहानी

मूर्ती :- महाराज आपके बाजु मे जो मंत्री खड़ा है जो खुदको बुद्धिमान मानता है लेकिन वह बुद्धिमान नही है और अंदर से पुरा खोखला है । मूर्ख है ।

( यह सुनकर बुद्धिराम आश्चर्यचकित हो गये । सभी मंत्री बुद्धिराम को देखने लगे )

बुद्धिराम :‌- महाराज ये मुर्ती सच मे बहुत कमाल की है । मैंने ऐसा मूर्ती पहली बार देखा है । यह बोलकर बुद्धिराम चुप हो गये ।

राजा :‌- क्या हुआ बुद्धिराम क्यों चुप हो गये ।

बुद्धिराम :- मुझे इस मुर्ती पर कोई गलत परछाई लग रही है ।

(बुद्धिराम ने एक सैनिक को कान मे कुछ कहा और भेज दिया )

थोड़े देर मे सैनिक खूब उबला हुआ गर्म पानी लाया और बुद्धिराम के पास रख दिया ।

बुद्धिराम मुर्ती को गौर से देखा तो पिछे के तरफ एक बड़ा सा छिद्र दिखाई दिया । बुद्धिराम ने वहा पर उबला हुआ गर्म पानी दाल दिया कि तुरंत चिल्लाने कि आवाज़ आने लगी “ हाय मर गया रे ” फिर तुरंत उसमे से दो शिष्य निकलकर भागने लगे । लेकिन सैनिको ने पकड़ लिया । साधू राजनाथ भागने की कोशिश करने लगा तो उसे भी पकड़ लिया ।

बुद्धिराम :- महाराज ये साधू पड़ोसी के राज्य का है । ये अपने राज्य मे जासूस करने आये है ।

राजा :- इन लोगो को जेल मे डाल दिया जाये ।

सैनिको ने साधू और उनके चेलो को जेल मे डाल दिया ।

ईमानदार चित्रकार ( Baccho wali Hindi Kahani )

Kahani HindiBaccho ki kahani

एक धनंद्पुर नाम का बड़ा सा गांव था । जहा का राजा धनंतसिन्ह थे । गांव मे एक मशहूर चित्रकार था । जिसका नाम चित्रसिन्ह था ।

चित्रसिन्ह का चित्र इतना सुंदर होता था कि जो देखता वह देखता ही रह जाता । इसलिये गांव वाले उसे मशहूर चित्रकार कहते थे ।

राजा कों चित्रसिन्ह के बारे मे पता चला तो राजाने चित्रसिन्ह को दरबार मे बुलाया

राजा कहते है :- अगर तुम अच्छा सा पेंटिंग बनाओगे तो मै तुम्हे एक हजार सोनामहोर दुंगा ।

और अपने सभी दरबारी के साथ बनाये चित्र को देते है

 राजा कहते है :- इस चित्र मे मेरा मुँह टेड़ा बना था । जिसे तुम अपने पेंटिंग मे सिधा करके बनाना । गलती मत करना ठीक है ।

चित्रसिन्ह:- ठीक है महराज ।

राजा चले जाते है ।

इतने मे एक बुजुर्ग मंत्री आता है और कहता है :- बेटा चित्र मे मेरा मुँह जैसा था तुम अपने पेंटिंग मे सही कर देना मैं तुम्हे सौ सोने की मोहरे दूंगा ।

ईमानदार चित्रकार की कहानियां पढ़ें

चित्रसिन्ह :- ठीक है मंत्री जी ।

दूसरा मंत्री आता है और चित्रसिन्ह से कहता है । चित्र मे मेरा पैर टूटा था ।

लेकिन तुम अपने पेंटिंग मे एसा मत बनाना उसे सुधार देना । मैं तुम्हे पचास सोने की महोर दूंगा ।

फिर एक राजपूत आता है और कहता :- पूराने चित्र मे मेरा कान और नाक नही था ।

तुम पेंटिंग मे कान और नाक भी लगा देना । मै तुम्हे एक कीमती तलवार दूंगा ।

चित्रसिन्ह :- ठीक है राजपुत जी।

अंत मे एक दरबारी आता है और विनती करके कहता है ।

भाई मैं पुराने चित्र मे शारीरिक रूप से दोषी था । कृपया अपने पेंटिंग मे मेरा टेड़ा मैडा शरीर मत बनाना उसे सिधा कर देना ।

चित्रसिन्ह :- ठीक है ।

यह बोलकर चित्रसिन्ह चित्र लेकर घर गया ओैर दस दिन बाद अपना पेंटिंग बनाकर लाया।

पेंटिंग बना नही था । वह केवल कोरा कागज ही था ।

ईमानदार चित्रकार की कहानी

चित्रसिन्ह दरबार मे लाया और कहा :- यह चित्र मुर्ख, दुष्ट और अभिमानी व्यक्ति को नही दिखेगा केवल समझदार और इमानदारो को ही दिखेगा ।

यह बोलकर चित्रसिन्ह अपने पेंटिंग का पर्दा हटाया तो पेंटिंग नही बल्कि कोरा कागज था ।

सभी अपने आप को इमानदार और समझदार मानने के लिए वाह – वाह कह्ने लगे और बोलने लगे कि क्या खू़बसूरत पेंटिंग है वाह……  

चित्रसिन्ह :- महराज अगर आपको ये पेंटिंग सुंदर लगी हो तो मुझे मेरा पुरस्कार दो

राजा :- चित्रसिन्ह तुमहारा पेंटिंग सुंदर तो है लेकिन पुरस्कार कल मिलेगा ।

कल चित्रसिन्ह दरबार मे गया तो राजाने चित्रसिन्ह को अकेले मे पुछा :- चित्रसिन्ह, तुमने चित्र नही बनाया ओैर हमारे साथ धोखा किया ।

चित्रसिन्ह :- धोखा तो तुम सब ने किया तुम लोगो मुझे भय, दोष, लालच देकर अपने शरीर के दोषों को छुपाने के लिये मुझसे पेंटिंग मे परिवर्तन करने के लिये बोल रहे थे।

दुनिया मे वीर जवान वही होते है । जो अपने दोष को छुपाने के वजाय उसका हल करके समाधान करते है ।   

यह सुन राजा खुश हुआ और चित्रसिन्ह को पूरस्कार दिया ।

मूर्खो का गांव और तालाब ( Baccho ki Kahani for Kids )

Murkho ka gav or talab

Baccho ki kahani

एक मिनकपुर नाम का गांव था । गांव बहुत छोटा था । पुरे गांव मे केवल एक ही तालाब था । जहां से गांव की औरते पानी भरने जाती थी ।

गांव मे एक बड़े से शेठ के घर मे शादी हुई । जो उनके बेटे मगन की शादी दुसरे परिवार की लडकी के साथ और लड़की सुंदर भी थी ।

मगन की पत्नी अपने सहेली के साथ कुएँ से पानी भरने जाती थी । एक बार मगन की पत्नी अकेले पानी भरने गयी । पानी जब कुएँ से निकाली तो उसमे से एक मेढ़क निकला ।

मेढ़क थोड़े देर मगन की पत्नी को देखा और ड्रॉ ड्रॉ – ड्रॉ ड्रॉ करके वापस कुएँ मे कूद गया । मगन की पत्नी को लगा कि वो मेढ़क उसका अपमान कर दिया और घर जाकर अपने पति मगन को बतायी और

बोली कि :- एक मेढ़क ने तुमहारे पत्नी का अपमान किया है बदला जरूर लेना ।

मगन गया और पुरे गांव वालो को चिल्लाकर बुलाया और सारी बात बता दिया और कहा :- ये अपमान केवल मेरी पत्नी का नही बल्की गांव के सारे स्त्री का अपमान है हम बदला जरूर लेंगे

सभी गांव वाले उस कुएँ के पास जा पहुचे । कुछ लोगो ने कुएँ मे पत्थर फेका तो कुछ ने बाल्टी फेका लेकिन मेढ़क नही दिखा ।

मूर्खो का गांव और तालाब की कहानी

सभी बोले :- लगता है मेढ़क बहुत बड़ा है । हमे कोई दुसरा तरीका सोचना पड़ेगा ।

थोड़े देर मे एक ने कहा :- लगता है मेढ़क ऐसे नही मानेगा कुएँ को ही खिसकाना पड़ेगा । सभी ने “हा” कहकर अपना अपना शर्ट और पगड़ी निकालकर एक बड़ा सा रस्सी बनाते है और कुएँ से बांध देते है ।

सभी रस्सी को मजबूती से पकड़कर खिचने लगते है और बोलते है

“जोर लगाकर हाइ शा ” इतना जोर से खिचते है कि रस्सी मे से फटने का आवाज आने लगता है सभी बोलने लगते “ कुँआ खसक रहा है ”

एकाएक मे रस्सी टूट जाती है और सभी एक दुसरे पर लाइन से गिर पड़ते है सभी बोलते है :- कुँआ खिसक गया, कुँआ खिसक गया ।

वहा से आने ‌- जाने वाले कहते है “कुँआ नहीं इनकी बुद्धि खिसक गयी है ”

 

आलू से सोना ( Read Baccho ki Hindi Kahani )

Kahani HindiBaccho ki kahani

एक कनकपुर नाम का गांव था । गांव मे दो भाई रहा करते थे । एक का नाम रामू और दुसरे का नाम श्यामु था । रामू स्वभाव मे ईमानदार था लेकिन गरीब था ।

जबकि श्यामु स्वभाव मे मुर्ख और घमंडी था लेकिन वह अमीर था । रामु झोपड़ी मे रह कर अपना गुजारा करता था । परंतु श्यामु के पास बड़ा सा बंगला था ।

रामू जब भी श्यामु से मदद मांगता तो श्यामु मदद नही करता उपर से डाँटकर भगा देता । रामू लकड़ियाँ बेचकर गुजारा चलाता था ।

एक बार रामू लकड़ी काटने जंगल गया तो उसे रस्ते मे एक पेड़ दिखाई दिया जिसके तने मे कुछ चमक रहा था । जब पास गया तो हीरा दिखाई दिया ।

रामू हीरा लेकर घर आया । घर पत्नी को बताया ।

उसकी पत्नी घर का गुजारा चलाने के लिये हीरे को बेच देने के लिये कहा । रामू हीरे को बेचने बाजार चला गया ।

बाजार मे एक व्यक्ति एक मशीन लेकर खड़ा था ।

आलू से सोना की कहानी

उसने रामू को हीरे के साथ देखा और रामू से कहा :- अगर तुम मुझे ये हीरा दोगे तो मै तुम्हे ये मशीन दुंगा ।

जबकि ये मशीन कोई साधारण मशीन नही है ये एक जादुई मशीन है

आप इसमे आलू डालोगे और एक मंत्र बोलोगे तो आलू सोना बनकर निकलेगा ।

रामू :- इसका मंत्र क्या है । व्यक्ति :- इसका मंत्र है :- सोना बना सिम सिम….  

रामू हीरा देकर मशीन लेकर घर चला आया । घर पहुँचते ही जब उसकी पत्नी देखी तो परेशान हो गयी और बोली

पत्नी :- यहा अनाज के लिये पैसे नही है और तुम ये मशीन लेकर आये हो ।

रामू उसे सारी बात बताता है । उसकी पत्नी आलू लाकर दे देती है और बोलती है

पत्नी :- लो इसे सोना बना कर दिखाओ ।

रामू आलू मशीन मे डालता है और मंत्र बोलता है सोना बना सिम सिम…. तुरंत आलू सोने का बनकर निकल जाता है । रामू कि पत्नी देखते ही रह जाती है ।

रामू सोने का आलू बाजार मे बेचता और पैसे कमाता । रामू जल्दी ही अमीर हो गया । रामू का बंगला श्यामु से ज्यादा बड़ा हो गया ।

आलू से सोना की कहानी पढ़ें हिंदी में

रामू अपने भाई श्यामु से ज्यादा अमीर हो गया । श्यामु पुरी तरह चौक गया और सोचने लगा कि “ रामू इतना गरीब से इतना अमीर कैसे हो गया ” फिर श्यामु अपने भाई रामू के घर पर ध्यान देने लगा ।

एक बार श्यामु ने देखा के रामू एक मशीन मे आलू डालता है और वह आलू सोने का बन जाता है ।

श्यामु समझ जाता है और चोरी करने का योजना बना लेता है

और एक रात मे ही रामू के घर से मशीन चुरा लेता है । और अपने घर लेकर आ जाता है ।

दुसरे दिन श्यामु मशीन मे आलू डाला लेकिन आलू से सोना नही बना । श्यामु बहुत कोशिश किया लेकिन सोना नही बना ।

श्यामु गुस्से मे मशीन मे जहा आलू डाला था वही हाथ डालकर आलू निकालने गया कि उसका हाथ मशीन मे फंसने से हाथ ही कट गया और श्यामु अपना हाथ ही खो बैठा ।

 

आलसी बैल ( Baccho ki Hindi Kahani )

Kahani Hindi

एक किसान था जिसके पास एक बड़ा सा खेत था । किसान रोज खेत जोतने के लिये बैल को लेकर जाता था ।

बैल बहुत मजबूत और शक्तिशाली था । वह अकेला पुरे खेत को जोतता था ।

एक बार खुब ज्यादा बरसात होने के कारण किसान का खेत नुकसान हो गया जिससे किसान बहुत उदास हो गया और उसी दिन बैल को भी कम खाने को मिला था ।

जिससे वह अपने मालिक से उदास था । खेती मे ज्यादा नुकसान होने से बैल को कम घास खाने के लिये मिला तो वह उस दिन काम ही नही किया ।

किसान की मजबूरी आखिर समझता ही कौन है ? किसान का खेती मे नुकसान होता जा रहा था और बैल भी धीरे – धीरे आलसी बना जा रहा था ।

बैल धीरे – धीरे खेत जोत रहा था । इस कारण से किसान का अनाज ज्यादा समय मे कम उगा करता था ।

आलसी बैल की कहानी पढ़ें हिंदी में 

खेती जल्दी न होने से किसान ज्यादा चिंतित रहा करता था ।

एक बार बैल खेत जोतते वक्त अचानक देखा कि दुसरे खेत मे एक किसान खेत को ट्रैक्टर जैसे यंत्र से जोत रहा था

वो भी खूब तेजी से काम कर रहा था । बैल सोचा ( ये कौन सा यंत्र है जो मेरे से भी तेजी से काम कर रहा है । )

अचानक मे बैल का ध्यान उसके मालिक पर गया कि उसके मालिक यंत्र वाले किसान से यंत्र के कीमत के बारे मे पुछ रहे थे ।

बैल समझ गया कि “ मेरे मालिक ट्रैक्टर जैसा यंत्र खरीदेंगे और मुझे भगा देंगे जिससे मुझे खाने – पिने को भी नही मिलेगा लेकिन मै एसा नही होने दुंगा ”

बैल अपने काम मे आलस करना छोड़ दिया । कुछ समय बाद किसान का खेती धीरे – धीरे अच्छे से होने लगा ।

किसान खु़श हो गया और अपने बैल को ज्यादा घास देने लग गया ।

इससे किसान को ट्रैक्टर भी नही लेना पड़ा और बैल को भी ज्यादा खाने को मिलने लगा ।

इस प्रकार बैल अपना आलस छोड़कर अच्छे से काम करने लगा ।

 

समझदार कोयल

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एक सिखंपुर नाम का राज्य था जिसके राजा चंद्रसैन थे । राजा हमेशा प्रजा का मदद करते थे, उन्हे न्याय देते थे और प्रजा का कल्याण करते थे । राजा को शिकार करने का बहुत शोख़ था राजा शिकार करने अकेले ही निकला करते थे ।

एक दिन राजा शिकार करने निकले थे । राजा शिकार करते – करते जंगल मे बहुत दूर तक पहुँच चुके थे । जंगल इतना घना था कि दूर – दूर तक कुछ दिखाई नही दे रहा था । राजा को प्यास लग गयी थीं ।

जंगल में आसपास तक कोई घर तक नही दिख रहा था । राजा पानी के लिये यहां – वहां भटकने लगे । उनका गला सूख चुका था । वह पानी ढूँढने के लिये यहां – वहां भटक रहे थे । उन्हें एक पेड़ पर एक कोयल मधुर गीत गा रही थी ।

महाराजा :- क्या मधुर संगीत है यह बोलकर राजा आगे गये तो उन्हे पानी के झरने कि आवाज़ सुनाई दी । राजा ने देखा तो वहा पानी का झरना था । लेकिन पानी बहुत पतली धारा मे बह रही थी ।

समझदार कोयल की कहानी पढ़ें हिंदी में 

राजा तुरंत लोटा लेकर पानी लेने के लिये झरने के पास गये । और लौटा लगा दिया । कोयल ने राजा को विषयु्क्त पानी भरता देखकर घबरा गया और सोचा “ अगर राजा विषयु्क्त पानी पी लेंगे तो उनकी मृत्यु हो जयेगी ” मैं ऐसा नही होने दूँगा यह बोल कोयल तुरंत पानी का लौटा गिरा दिया ।

महाराजा ने फिर से लोटा रख दिया । फिर से कोयल ने पानी का लौटा गिरा दिया । राजा कहते है :- अगर अब लौटा गिराया तो तुम्हें मृत्यु कि सजा मिलेगी । कोयल नही मानता है वह फिर जाकर पानी के लौटे को गिरा दिया । और झरने के पानी पर बैठ गया ।

क्रोध में आकर धनुष मे तीर डालकर कोयल पर निशाना लगाया और मार दिया ।

निशाना कोयल के शरीर के बिचोबीच लगा और कोयल पानी के साथ बहते‌ – बहते आया उसी के साथ एक साँप आया जो पहेले से मरा हुआ था ।

राजा को तुरंत समझ मे आया कि :- पानी के साथ साँप का जहर भी आ रहा था ।

मुझे विषयु्क्त पानी पिने से कोयल रोक रही थी । लेकिन मेंने निर्दोष कोयल को मार दिया । यह सोच राजा तुरंत कोयल के शरीर से तीर निकाला ।

लेकिन कोयल मर ही चुकी थी । राजा को बहुत पश्चाताप हुआ जो निर्दोष पक्षी की जान ली । इसके बाद राजा ने कसम खा लीं की वह अब कभी शिकार नही करेंगे ।

चालाक तोता

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एक मनीलाल शेठ के पास एक तोता था । तोता को शेठ हमेशा पिंजरे मे रखता था। और तोते को खाने पिने का भी बहुत कम देता था । तोता खुब बुध्दिमान था ।

बोलने मे खुब तेज था ।तोता को खाने‌-पिने का बहुत कम मिलने के कारण तोता इस लालची शेठ के पिंजरे से निकलने का योजना बनाता था लेकिन सब नाकाम हो जाता था ।

क्योकी शेठ तोते को किसी भी हालत मे बाहर नही निकालता था। खाना कम मिलने से तोता कों कभी-कभी भुखा रहना पड़ता था ।

एक बार शेठ मनीलाल का सोने की अँगूठी घर मे कही गुम हो गया । शेठ ने खुब ढूँढा साथ मे उनकी पत्नी भी ढूँढी पंरतु मिला नही ।

पत्नी ने नया ले- लेने को कहती लेकिन लालची शेठ मना करता और कहता कि :- वो मेरा सबसे किमती अँगूठी था । मै और पैसे खर्च करके दुसरा अँगूठी क्यों खरीदूँ ।

तुम्हे ढूँढना है तो ढ़ूँढो नही तो हट जाओ । शेठ मनीलाल अँगूठी को ढूँढ़ने मे लगा था

तोता सोचता है ( यही समय है शेठ मनीलाल के पिंजरे से बचने का, कोई तरकीब बनाना पड़ेगा )

चालाक तोता की कहानी पढ़ें हिंदी में 

तोते ने कहा :- शेठ मैंने सुना है कि आपका सोने का अँगूठी खो गया हैं |

शेठ ने कहा :- हां, क्या तुम्हे देखे हो ।

तोते ने कहा :- हां मुझे पता है कि कहा है अगर तुम मुझे पिंजरे से निकालोगे तो मैं तुमहारा अँगूठी तुरंत ढूंढकर दे दूँगा ।

शेठ ने कहा :- सच मे तुम मेरा अँगूठी ढूँढ निकालोगे ।

तोते ने कहा :- हां

( शेठ मनीलाल तोता को पिंजरे से निकाल देता है )

तोता यहां ‌- वहां ढूँढाता है जैसे ही शेठ मनीलाल का नजर तोते पर से हाटता है । तो तोता चालाकी से मौका देखकर वहा से उड़ जाता है ।

जबकि शेठ मनीलाल वही सिर पर हाथ रखकर बैठ जाते है और बोलते है अँगूठी तो गया साथ मे तोता भी गया ।

 इस प्रकार शेठ का अँगूठी और तोता दोनो गया ।

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ठगना

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एक रोनकपूर नाम का गांव था जहा एक छोटा सा घर था । उस घर मे सीता नाम की स्त्री रहती थी उसका एक बेटा था जिसका नाम रामू था ।

रामू बहुत छोटा था लेकिन ईमानदार था । वह हमेशा अपने मम्मी की मदद करता था ।

जैसे बाहर से समान लाना, पानी भरकर लाना, लकड़ियाँ लाने जैसे काम करता था ।

एक दिन सीता अपने बेटे रामू को एकबार बीस रूपए का इलाइची लाने के लिये कहा ।

रामू तुरंत दौड़कर दुकान पर गया और बीस रूपए का इलाइची मांगा । दुकानदार काटें पर बीस ग्राम एक तरफ रखा और दुसरे तरफ इलाइची डालने लगा ।

“ठगना” कहानी पढ़ें हिंदी में

इलाइची के साथ एक रुपये का सिक्का भी गिर गया । रामू इलाइची के साथ एक रुपये देखकर खुश हो गया कि “मुझे इलाइची के साथ एक रुपये का सिक्का मिल रहा है ”

इसलिये रामू दुकानदार को कुछ नही बोला और बीस रुपये का इलाइची लेकर खुशी – खुशी से अपने घर आने लगा ।

रामू अपने मम्मी को बताने लगा कि “इलाइची के साथ मुझे एक रुपये भी मिल गया ” उसकी मम्मी सारी बात पूछी तो रामू सारी बात बताया ।

तो मम्मी ने रामू को समझाया कि बेटा इसमे अपने को हानी हुआ ।

रामू पूछा :- लेकिन कैसे ?

सीता ने कहा :- देखो तुमने बीस रुपये का बीस ग्राम इलाइची लाया लेकिन इसमे दस ग्राम केवल एक रुपये का सिक्का ही है ।

मतलब अपने को नौ रुपये का नुकसान हुआ । दुकानदार अपने को ठग लिया ।

रामू को समझ मे आ गया की दुकानदार उसका नौ रुपये ठग लिया ।

रामू सोचने लगा कि ( अगर मै दुकानदार से एक रूपये इलाइची मे से निकलवाता तो मुझे नुकसान नही होता )            

इस प्रकार रामू समझ गया की दुकानदार उसे ठग लिया ।

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