Hindi Story | Hindi Moral Stories

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Raja ki kahani

क्रूर राजा

एक रामपुर नाम का गांव था । गांव मे शेखसिन्ह नाम का राजा रहा करता था । राजा बहुत ही मुर्ख और अभिमानी था वह अपने राज्य के सभी प्रजा पर जुर्म करता था ।

जैसे कि उनसे अधिक धन छीनना, कर वसूलना । प्रजा से गलती न होने पर भी फासी जैसे सजा दे देता था ।

प्रजा अपने राजा से पुरी तरह से हैरान हो चुके थे ।

उसी गांव मे एक बुद्धिसिंह  नाम का एक बुद्धिमान व्यक्ति था । गांव वाले बुद्धिसिंह से मदद मांगने और राजा को सुधारने कि बात की ।

बुद्धिसिंह राजा को सुधारने के लिये तरकीब सोचा और राजा के महल मे चला गया और राजा कब क्या करता है उसको देखने लग गया ।

वैसे तो राजा के आस पास दो सैनिक रहते थे लेकिन बड़े चतुराई से राजा कब क्या करता है वह देख लिया ।

उसके बाद वह पाँच गांव वालो को बुलाकर नदी के पास के पेड़ के नीचे खड्डा खोद्वा दिया और उसमे एक अजगर डाल दिया ।

खड्डे के उपर पेड़ का डाल बिछाकर पत्ते डाल दिया और वही से रस्सी गिराकर पेड़ से बांधकर जाल बिछा दिया ।

दुसरे दिन जैसे ही राजा घूमते – घूमते जंगल मे उस नदी के किनारे पेड़ के निचे जैसे ही पहुँचा कि रस्सी उनके पैर मे बंध गयी और राजा खड्डे कि ओर उलटा हो गये ।

बच्चों की हिंदी कहानी

बुद्धिसिंह पेड़ पर बैठकर रहे थे । और वहा एक बाघ भी आ गया । सैनिको ने बाघ के देखते ही वहा से भाग निकले ।

राजा को निकलने का कोई मार्ग नही था । क्योकि खड्डे मे अजगर और बाहर बाघ था ।

बुद्धिसिंह का तरकीब बिलकुल अच्छे से सफल हो गया ।

राजा खुब चिल्ला रहा था कि बचाओ मुझे बचाओ लेकिन कोई बचाने नही आया कि तभी पेड़ पर बैठे

बुद्धिसिंह ने कहा :- मुर्ख राजा तु अपने आप को भगवान मानता है ।

राजा ने कहा :- तुम कौन हो

बुद्धिसिंह ने कहा :- मै तेरा भगवान

राजा ने कहा :- मुझे माफ कर दो भगवान मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी मुझे बचा लो भगवान ।

बुद्धिसिंह ने कहा :- तो तु क्यों प्रजा पर जुल्म करता है और बिना गलती के सजा क्यों देता है ।

राजा ने कहा :- भगवान मुझे माफ कर दो मै दुबारा ऐसी गलती नही करूँगा ।

बुद्धिसिंह भगवान कि आवाज मे राजा को समझाया और छुप कर पेड़ से उतरा और गांव वालो को बुला लाया । गांव वाले राजा को बचा लिया ।

दुसरे दिन से राजा पुरी तरह से बदल गये और प्रजा के कल्याण के काम करना शुरु कर दिये और प्रजा भी खुश हो गयी ।

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Hindi Story for Kids with Images | Read Hindi Moral Stories

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adhunik-soch ki kahani

आधुनिक सोच

गीर जंगल की बात है जहा एक चालक और समझदार खरगोश रहा करता था ।

वही एक बड़ा सा कछुआ रहता था । कछुआ और खरगोश दोनो दोस्त थे ।

एक दिन कछुए ने खरगोश के साथ दौड़ने वाला प्रतियोगिता रखा । खरगोश ने स्वीकार कर लिया ।

कछुए ने कहा :- अगर तुम इस दौड़ प्रतियोगिता मे हार गये तो तुम्हे ये जंगल छोड़कर जाना होगा ।

खरगोश ने कहा :- लेकिन अगर तुम इस दौड़ प्रतियोगिता मे हार गये तो तुम्हे भी जंगल छोड़कर जाना होगा ।

कछुए ने हां बोलकर दौड़ने की प्रतियोगिता की शुरुआत किया ।

और खरगोश से कहा हम दोनो को उस पहाड़ पर रहे लाल झंडे तक पहुँचना है । जो पहले पहुँचेगा वह विजेता होगा ।

दोनो एक जगह से दौड़ने की प्रतियोगिता शुरु किये ।

खरगोश तेजी से दौड़ रहा था जबकि कछुआ धीरे – धीरे दौड़ रहा था ।

दौड़ते – दौड़ते आधे रस्ते तक आ गया और पीछे देखा तो कछुआ धीरे – धीरे आ रहा था ।

आधुनिक सोच की हिंदी कहानी

खरगोश सोचा की थोड़ा आराम कर लु लेकिन उसे

अचानक मे पुरानी कहानी याद आ गया कि “ खरगोश और कछुए के दौड़ मे खरगोश हार गया था ” लेकिन मैं नही हारुंगा ।

यह सोचकर खरगोश खूब तेजी से दौड़ना शुरु किया और

पहाड़ पर रहे लाल झंडे तक पहुँच गया और प्रतियोगिता मे जीत गया ।

जबकि कछुआ धीरे – धीरे वहा पहुँचा । कछुआ देर करने से हार गया ।

कछुआ खरगोश से कहा :- क्या तुम आधे रस्ते मे आराम नही किये ?

खरगोश :‌‌- क्योकि मुझे पुराना कहानी याद था कि पुराने कहानी मे खरगोश आधे रस्ते मे सो जाता है

और कछुआ प्रतियोगिता मे जीत जाता है ।

लेकिन मैंने एसा नही किया क्योकि प्रत्येक कहानी से हमे कुछ न कुछ सिखने को मिलता है ।

कछुआ :- मुझे लगा कि इस बार भी पुराने कहानी के जैसा ही होगा । लेकिन नही हुआ ।

खरगोश :‌‌- समय हमेशा बदलता रहाता है मतलब कभी समय एक जैसा नही आता है ।

इसलिये हमेशा समय के अनुसार अपने विचार को बदलते रहना चाहिये ।

कछुआ समझ गया । खरगोश ने कछुए को दिये शर्त को माफ कर दिया ।

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New Kids Stories in Hindi Moral and Video

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जंगल मे बना स्कूल

एक सुंदरवन नाम का जंगल था । जहां बहुत सारे प्राणी रहा करते थे ।

जंगल मे सभी मिलजुलकर रहा करते थे । एक बार

टिंकू हाथी जंगल मे स्कूल बनाने कि बात राजु बंदर से कहता है ।

राजु बंदर कहा :- यह विचार तो बहुत अच्छा है । लेकिन हम स्कूल कैसे बनवायेंगे ।

टिंकू हाथी :- हम जंगल के राजा शेर से मिलते है वो स्कूल का योजना करेंगे । लेकिन पढ़ायेगा कौन ?

राजु बंदर कहा :- अरे रम्भु भालु है न, उन्हे सबकुछ आता है वे खुब ज्यादा पढ़ाई किये है वे पढ़ायेंगे ।

टिंकू हाथी :-  तो हम पहले रम्भु भालु से मिल लेते है कि अगर स्कूल बनेगा तो वह पढ़ायेंगे की नही ?

राजु बंदर कहा :- ठीक है पहले रम्भु भालु से पुछ लेते है ।

दोनो रम्भु भालु क पास पहुच जाते है । और स्कूल बनवाने कि बात कहते है ।

रम्भु भालु :- यह तो खुब अच्छा विचार है ।

अगर जंगल मे स्कूल बनेगा तो जंगल के सभी लोग इसका लाभ उठा सकते है ।

( स्कूल वाली बात पुरे जंगल मे फैल गयी )

कई जानवर को अच्छा लगा कि जंगल मे स्कूल बन जायेगा तो हमारे बच्चे स्कूल मे जायेंगे और पढ़ाई करेंगे ।

लेकिन यह बात लोमड़ी को अच्छा नही लगा । वह जंगल मे स्कूल बनवाना नही चाहता था ।

जंगल में बना स्कूल की हिंदी कहानी

उसने पहले ही शेर के पास स्कूल न बनवाने के बारे मे बता दिया ।

और कहा कि :- महाराज भालु को कुछ भी आता नही है ।

वह केवल खुदको पढ़ा – लिखा मानता है ।दुसरे दिन जब जंगल मे सभा रखा गया ।

जहा सभी प्राणी और हाथी, भालु, बंदर जैसे लोग भी इकट्ठा हुए और स्कूल बनवाने के बारे मे शेर से कहने लगे ।

हाथी ने कहा :- महाराज हम जंगल मे एक स्कूल बनवाना चाहते है और रम्भु भालु सभी जानवरो को पढ़ायेंगे ।

जिससे जंगल के सारे जानवर को पढ़ाई का लाभ मिलेगा । शेर ने भालु से सवाल पूछा तो भालु जवाब दे दिया ।

फिर शेर ने भालु से कहा :- लोमड़ी ने कहा कि तुम्हे कुछ नही आता है । मतलब लोमड़ी मुझसे झूट बोला ।

शेर लोमड़ी पर गुस्सा गये लेकिन तुरंत लोमड़ी माफी मांगने लगा और

कहा :- महाराज मुझे माफ कर दो मै ईष्र्या के कारण स्कूल नही बनवाना चाहता था ।

ऐसी गलती कभी नही करूँगा ।

शेर लोमड़ी को मांफ कर देते है और जंगल मे स्कूल बनना शुरु हो जाता है ।

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शेर का बंदर से दोस्ती

एक जंगल मे शेर रहा करता था । वह हमेशा बंदरो का शिकारा करता था ।

बंदर हमेशा शेर से डरकर पेड़ों पर रहा करते थे । एक बार शेर एक शिकार करने आया था ।

शिकार मे ही उसके पीठ पर काँटा घुस गया । शेर को खूब दर्द होने लगा ।

वह शेरनी के पास गया और अपने पीठ पर घुसे काँटे के बारे मे बताया ।

शेरनी काँटा निकालने का खूब प्रयास की लेकिन सब असफल रहा क्योकि शेरनी के नाखून इतने बड़े नही थे

कि वह काँटा निकाल सके ।

शेर खूब परेशान था । शेरनी ने बताया कि इसे केवल बंदर ही

निकाल पायेगा क्योकि बंदरो के नाखून बड़े और तेज होते है ।

तुरंत दौड़कर बंदरो के टोली के पास गया और टिंकू बंदर को बुलाया ।

परंतु टिंकू बंदर नही आया क्योकि उसे डर था कि कही शेर मुझे पकड़कर खा न जाये ।

शेर ने कहा :- मेरे पीठ पर काँटा घुस गया है क्या तुम निकाल सकते हो ।

टिंकू ने कहा :- नही, आप झूट बोल रहे हो ।

आप मुझे अपना शिकार बनाने के लिये अपने जाल मे फंसाने का सोच रहे हो ।

जिससे मै आपके पास जाऊँगा तो आप मुझे अपना शिकार बना लोगे ।

शेर का बंदर से दोस्ती की हिंदी कहानी

शेर ने कहा :- ठीक है मै खुदको इस पेड़ से बाँध लेता हु ।

( वो शेरनी से खुदको बंधवा दिया और शेरनी वहां से चली गयी  )

फिर टिंकू बंदर पेड़ से उतरा और शेर के पीठ से बड़ी मुश्किल से निकाला ।

शेर को आराम आ गया । शेर ने टिंकू बंदर को वचन दिया कि

जब तुम पर मुसीबत आयेगा तो मै तुम्हें बचाने जरूर आउंगा ।

शेर ने कहा :-  अब मेरा गाँठ खोल दो । अब से मै तुमहारा दोस्त हु ठीक है ।

टिंकू बंदर ने शेर को बंधा हुआ गाँठ खोल दिया ।

टिंकू ने कहा :- आप एक काम कर दो । केवल आप मुझे अपने पीठ पर बैठाकर मेरे दोस्त के पास तक ले चलो

शेर टिंकू को उसके दोस्त तक ले जाता है । टिंकू के दोस्त भी निचे उतर जाते है । और साथ मे खेलने लगते है ।

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