Jadui Kahani

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जादुई चुल्हाjadui chulhe ki Kahani in Hindi

रामपुर गाँव मे एक गरीब रामू नाम का किसान रहता था ।

वह किसान एक बार भोजन किये बिना ही सोता था ।  

एक दिन जब रामू खेत मे काम कर रहा था । तब उसे एक छोटा सा चुल्हा मिला ।

रामू सोचने लगा कि मै इस चुल्हे को लेकर क्या करूँगा फिर भी वह चूल्हे को लेकर अपने घर गया ।

जब रामू घर पहुचा तो उसकी पत्नी पूछी :- ये चुल्हा क्यों लाये हो ?

रामू :- अरे ये चुल्हा मुझे खेती करते वक्त मिल गया । वैसे भी इसका उपयोग तो था ही इसलिये लेते आया ।

राम की पत्नी चुल्हे को जलाने लगी कि अचानक मे बिना लकड़ी डालें ही चूल्हा जलने लगा ।  रामू की पत्नी

आश्चर्यचकित हो गयी और रामू से बोलने लगी

 रामू की पत्नी :- देखो – देखो ये चुल्हा अपने आप जलने लगा ।

रामू भी देखकर चौक गया और समझ गया के जरूर ये चुल्हा कोई जादुई है ।रामू अपने पत्नी से कहा :- हम

इस चुल्हे से धंधा करेंगे और अपने पत्नी को योजना समझा दिया । रामू दुसरे

दिन से रामू अपने घर के पास छोटा सा बिरयानी का दुकान खोल दिया

और दुकान चलाने लगा वैसे तो चूल्हा तो बिना लकड़ी के ही जलता था ।

जादुई चुल्हा की कहानी पढ़ें हिंदी में

इस कारण से पहले दिन रामू मुफ्त मे सबको बिरयानी खिलाया ।

रामू का धंधा चलना शुरु हो गया । धिर-धिरे ग्राहक बढ़ते गये, रामू ने एक नौकर को रखा ।

और रामू का दुकान नौकर चालाने लगे । रामू धीरे धीरे अमीर होते गया ।

शहर के लोग  रामू के दुकान मे बिरयानी खाने के लिए आने लगे ।

रामू को ज्यादा मुनाफा मिलने लगा और रामू ने चार नौकरो को रख लिया । और नया बांगला खरीद लिया ।

रामू ज्यादा अमीर होने से वह नशा मे खो गया और शराब पिना चालू कर दिया ।

उसकी पत्नी जब भी उसे दुकान मे जाने के लिये बोलती तो रामू मना कर देता और कहता अपने पास बहुत ज्यादा धन है । जब धन है तो काम क्यो करना ।

रामू की पत्नी बोली :- तुम दुकान मे नही रहोगे तो दुकान के नौकर चूल्हा लेकर भाग जायेंगे ।

रामू :- नही ऐसा नही होगा वो सब मेरे विश्वास पात्र नौकर है वो ऐसा नही करेंगे ।

लेकिन ऐसा ही हुआ । एक दिन नौकरो ने योजना बनाया की इस दुकान के मालिक कभी जाँच करने नही आते है।

हम सभी इस जादुई चुल्हे को लेकर और दुकान के सारे पैसे लेकर भाग जाते है ।

योजना अनुसार चारो नौकर शेठ रामू के दुकान से चुल्हा और कमाये पैसे लेकर फरार हो गये ।

इस बात का पता जब रामू को चला तो वह तुरंत अपने दुकान मे आया

देखा तो पुरा दुकान खाली था वह वही बैठकर पछताने लगा ।

Hindi Jadui Kahaniya

Jadui Kahani in Hindi for Kids

 

चमत्कारी पतेलीKahani Hindi

Jadui Kahani

एक मशरूमपुर नाम का गांव था । गांव मे दो भाई रहा करते थे ।

एक का नाम भोलू और दुसरे का नाम श्याम था ।

भोलु स्वभाव मे भोला था लेकिन गरीब था ।

जबकि श्याम स्वभाव मे मुर्ख और घमंडी था लेकिन वह अमीर था ।

भोलू झोपड़ी मे रह कर अपना गुजारा करता था । परंतु श्याम के पास बड़ा सा बंगला था ।

भोलू जब भी श्याम से मदद मांगता तो श्याम मदद नही करता और उसे महेनत करने के लिये बोलता ।

भोलू के पास छोटा सा खेत था जिसमे अनाज उगाकर बेचता लेकिन उससे आमदनी बहुत कम होती थी

इसलिये भोलू जंगल मे लकड़ियाँ भीं काटता और घर का गुजारा चलाता था ।

एक बार भोलू खेत जोत रहा था कि तभी उसे कुछ आवाज सुनायी दी और देखा तो कुछ चमक रहा था ।

भोलू जब उस जगह और खोदा तो उसमे से एक ताम्बे का पतेली निकला जो साधारण दिख नही रहा था ।

भोलू उस पतेली को लेकर घर गया । भोलू के घर खाना बनाने के लिये अनाज नही था ।

भोलू पतेली के बारे मे अपने पत्नी को बताया ।

उसकी पत्नी पतेली में जैसे ही थोड़ा सा चावल डाली

चमत्कारी पतेली की कहानी पढ़ें हिंदी में

कि तुरंत उसमे से खुब सारा चावल निकलना शुरु हो गया । और चावल का ढेर लग गया ।

भोलू और उसकी पत्नी दोनो चौक गये । दोनो ने खाना खाया ।

दुसरे दिन से भोलू उस जादुई पतेली से बहुत से अनाज निकालता और बाजार मे जाकर बेच आता ।

ऐसे ही धीरे – धीरे भोलू अपने भाई श्याम से ज्यादा अमीर हो गया ।

श्याम के नजर अपने भाई भोलू पर पड़ने लगा कि भोलु कैसे इतना अमीर हुआ ।

एक बार भोलु जब पतेली मे से अनाज निकाल रहा था

कि तभी उसका भाई श्याम ने उसे खिड़की से छुपकर देख लिया

भोलु जादुई पतेली मे अनाज का एक टुकड़ा डालता है और बहुत सारा अनाज निकलने लगता है ।

श्याम समझ गया कि भोलु जादुई पतेली से अमीर हुआ । श्याम जादुई पतेली को चुराने का योजना बनाता है

योजना अनुसार दुसरे दिन रात के समय श्याम अपने भाई भोलु के घर से जादुई पतेली को चुरा लेता है ।

कुछ समय बाद श्याम उस जादुई पतेली को बराबर देखता है

और उसमे डालने के लिये सेने का सिक्का लाता है और जादुई पतेली मे डाल देता है ।

सिक्का गायब हो जाता है श्याम चौक जाता है और हाथ डालकर ढूँढने लगता है

कि इतने मे श्याम का हाथ ही बहुत सारा बनने लगता है और श्याम का हाथ रावण के सिर से भी ज्यादा हो गया ।

इस प्रकार श्याम को उसके कर्म का फल मिल जाता है ।

 

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मृत्यु का डर mrityu ka dar ki Kahani in Hindi

एक राजा था जिसे खुद के मृत्यु का डर था ।

वह राजा हमेशा यही सोचता कि कही उसकी मृत्यु ना हो जाये ।

एक बार राजा जंगल मे शिकार करने गया था और शिकार करते वक्त एक बाघ ने

राजा को देख लिया और गुर्राकर राजा की और आने लगा मानो वह राजा को पकड़ कर खा जायेगा ।

राजा डर गये और रथ लेकर वापस आ गये ।

राजा राजमहल मे वापस आये तो रस्ते मे केले के छिल्के पर उनका पैर पड़ा और राजा फिसलकर गिर गये ।

राजा के कमर मे चोट आ गया । राजा और भी घबरा गये और डरने लगे की उनकी मृत्यु होने वाली है ।

और राजा उसे जेल मे डाल दिये जिसने केला का छिल्का गिराया था ।

फिर एक दिन राजा मंत्री के कहने पर तलवार बाजी खेल रहे थे

तलवार बाजी वक्त अचानक मे राजा के हाथ मे चोट लग गया तो राजा पुरी तरह घबरा गये ।

क्रोध मे आकर प्रतियोगी को जेल मे डाल दिये इसलिये की कही वह प्रतियोगी उनके मौत का कारण न बने ।

राजा इतना डर चुके थी कि वो सारे क्रियाकलाप छोड़ कर बैठ गये थे ।

एक दिन एक मंत्री राजा से पूछें :- महाराज आप तो सारे क्रियाकलाप को बंद कर दिये हो क्या इसका कोई कारण है ?

महाराज :- हा मंत्री जी, मुझपर कुछ दिनो से भयानक सा हमला हो रहा है ।

जब मै जंगल मे शिकार करने गया था तो बाघ ने मुझे दौड़ा लिया था ।

जब वहा से वापस महल मे आया तो केले के छिल्के से फिसल कर गिर गया

और जब मै तलवार बाजी खेल रहा था।

मृत्यु का डर की कहानी पढ़ें हिंदी में

तब मैरे हाथ मे चोट आ गया । मतलब एक तरफ से मुझ पर मृत्यु का हमला हो रहा हो ।

( मंत्री समझ गये कि राजा को मृत्यु से डर लग रहा है फिर मंत्री राजा को समझाते हुए कहते है )

मंत्री :- महाराज एसा कुछ नही है । जन्म ‌‌- मृत्यु प्रकृति का नियम है इसे कोई टाल नही सकता ।

व्यक्ति मृत्यु के लिये ही जन्म लेता है । व्यक्ति का समय उसका कार्य पर निर्भर होता है ।

व्यक्ति जैसा कार्य करेगा वह उतना समय तक जीवित रहेगा ।

जो व्यक्ति अच्छा कार्य करेगा वह व्यक्ति ज्यादा समय तक जीवित रहेगा और जो व्यक्ति खराब कार्य करेगा।

वह व्यक्ति कम समय तक जीवित रहेगा । जबकि ये प्रकृति का नियम है और इस प्रकृति का नियम तोड़ना मतलब महाविनाश करना ।

अगर आप अच्छे कार्य करोगे तो आपकी मृत्यु जल्दी नही होगी

लेकिन अगर आप खराब कार्य करोगे तो आपकी मृत्यु किसी भी हालत मे होगी ही चाहे कुछ भी कर लो ।

राजा समझ जाते है और उसके बाद से प्रजा के कल्याण का कार्य करना शुरु कर देते है ।

( प्रकृति का नियम यही कहता है कि जो व्यक्ति अच्छा कार्य करेगा

वह व्यक्ति ज्यादा समय तक जीवित रहेगा और जो व्यक्ति खराब कार्य करेगा

वह व्यक्ति कम समय तक जीवित रहेगा । इस नियम को कोई नही बदल सकता है । )

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विषैली नदीvisheili nadi ki Kahani in Hindi

एक केतनपुर नाम का गांव था । पुरा गांव एक नदी पर निर्भर थे ।

लेकिन कुछ दिनो से गांव मे लोग बिमार पड़ने लगे थे ।

जब गांव वालो को पता चला तो लोग जाँच करने लगे तो उन्हे पता चला कि नदी का पानी विषैला है ।

लोग नदी के पानी का उपयोग करना बंद कर दिये ।

गांव मे पानी के लिये लोग परेशान हो गये तो गांव का सरपंच एक कुँआ बनवा दिया ।

गांव वाले कुएँ से पानी लेने लगे लेकिन कुएँ से पर्याप्त पानी नही मिल पा रहा था ।

उसी गांव मे एक रामू नाम का किसान रहता था उस किसान का खेत उस नदी के पास था ।

वह उदास था क्योकि उसके खेत मे पानी नदी से आता था

नदी का पानी विषैला होने से उसका खेती नुकसान हो गया ।

उसके घर का आर्थिक परिस्थिति कमजोर हो गया । उसका एक बेटा था जिसका नाम चिंटू था ।

चिंटू अपने पिताजी को उदास देखा तो कारण पुछा तो

उसके पिता रामू अपने खेत के बारे मे बताया कि नदी का पानी विषैली आ रहा है ।

चिंटू ठान लिया की वह अपने पिता जी के परेशानी को दूर करुंगा ।

यह सोच चिंटू नदी के पास चला गया और नदी का पानी देखा तो उसमे केमिकल जैसा बद्बू आ रहा था ।

चिंटू नदी के बहने की दिशा के तरफ जाने लगा ।

विषैली नदी की कहानी पढ़ें हिंदी में

बहुत दूर जाने के बाद उसने देखा कि नदी एक झरने से बह रही थी और झरने की बिल्कुल बीच मे एक गुफा था ।

चिंटू तुरंत गुफा के तरफ जा पहुँचा ।

चिंटू जब गुफा के पास पहुँचा तो वहा से दो चोर बाहर निकल रहे थे ।

चिंटू छुप गया । दोनो वहा से गये तो चिंटू जब गुफा मे गया और देखा तो

वहा बहुत सारा केमिकल पड़ा था और केमिकल की साफ सफाई हो रही थी ।

चिंटू समझ गया की यही से पानी मे विषैली केमिकल डाल रहे है ।

चिंटू तुरंत वहा से भागा और अपने पिता रामू को बताया ।

रामू सरपंच को इस बात के बारे मे बताया तो सरपंच तुरंत

पुलिस को लेकर झरने के बीच वाले गुफा के पास पहुँच गये ।

उस मौके पर चोर भी गुफा मे थे । पुलिस तुरंत उन चोरो को पकड़ लिया ।

वहा से सारे केमिकल को हटवाया और साफ करवाया ।

इसके बाद से नदी का सारा पानी साफ आने लगा और गांव वाले फिर से पानी का उपयोग करने लगे ।

इस प्रकार चिंटू के चालाकी से नदी मे विष डालने वाले चोर पकड़ा गये ।

 

 

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सुनहरा तोताKahani Hindi

एक सिखरपुर नाम के गांव की बात है गांव के राजा चंद्रशेन बहुत महान और न्यायी थे ।

पुरे गांव वासी उनसे खुश रहते थे क्योकि चंद्रशेन अपने प्रजा का मदद हमेशा करते थे ।

चंद्रशेन इतने अच्छे थे कि पशु – पक्षी भी उनके बारे मे बोलते थे ।

दरबार मे कोई भी आता तो राजा चंद्रशेन उनकी इच्छा जरूर पुरी करते थे ।

कभी – कभी समय भी व्यक्ति की परीक्षा लेने लगता है ।

एक बार राजा चंद्रशेन और रानी राज्य के पिछे वाले बगीचे मे बात कर रहे थे

वही एक सुनहरा सा तोता अपने मैंना से राजा चंद्रशेन के बारे मे बता रहा था और वह तोता हिंदी मे बता रहा था ।

तोता मे अधिक सुनहरापन, शुद्ध भाषा मे बोलने और भविष्य बताने वाले गुण थे ।

रानी को वह तोता दिखाई दिया और बहुत पसंद आ गया । रानी ने राजा चंद्रशेन को तुरंत हुक्म दिया

रानी :- मुझे ये तोता बहुत पसंद आया है, मुझे आप ये तोता सुरक्षित लाकर दो ।

सुनहरा तोता की कहानी पढ़ें हिंदी में

राजा चंद्रशेन ने रानी को बहुत समझाया लेकिन रानी नही मानी और ज़िद्द करने लगी ।

राजा उस तोता को पकड़ने गये तो तोता उड़ गया ।

राजा उस तोता को ढूँढने के लिये धनुष – बाण लेकर जंगल मे चल दिये ।

जंगल मे बहुत ढूँढा लेकिन तोता कही नही दिखाई दिया ।

बहुत ढूँढने के बाद उन्हें एक पेड़ के तने मे बने घोसले मे वह सुनहरा तोता दिखाई दिया ।

राजा सोचा ( यही एक मौका है मै तोते के घोसले को बाहर से तीर मारकर बंद कर देता हु

जिससे तोता वही फंस जायेगा और मै उसे पकड़ लूँगा )

यह सोच राजा तोते के घोसले मे बाहर के तरफ जैसे ही तीर मारते है

कि तोता अपना सिर बाहर निकलता है कि तुरंत तीर तोते के गले मे लग जाता है और वही तोते की मृत्यु हो जाती है ।

यह देख राजा का ह्रिद्य पिघल जाता है और खुद से यह पाप सहन नही हुआ

और राजा बहुत क्रोध मे होकर अपने राज  महल मे गये ।

राजा बहुत गुस्से मे और रानी के प्रति घृणा मे थे ।

राजा महल मे आकर तुरंत हुक्म दिया कि रानी को कारावास मे हमेशा – हमेशा के लिये डाल दिया जाये ।

सैनिक आज्ञा अनुसार रानी को कारावास मे डाल दिया ।

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मूर्ख भाईMurkh bhai ki kahani in hindijadui kahani

एक रामूपुर नाम का गांव था जहा दो भाई रहा करते थे जिनका नाम रामू और श्यामू था ।

रामू स्वभाव मे समझदार एव ईमानदार था । जबकि श्यामू स्वभाव मे आलसी एव मूर्ख था । दोनो भाई अलग अलग घर मे रहते थे ।

दोनो अपने अपने हिस्से अलग अलग बाँट लिया । खेती का भी बँटवारा कर लिया था ।

लेकिन कुछ ऐसे चीजें थी जो बँट नही पाया जैसे एक भैस थी जो दोनो मे बँटने मे परेशानी खड़ी कर दिया था।

~ श्यामू चालाकी से रामू को कहा :- एक कम करो तुम भैस के आगे का भाग ले लो और मैं पीछे का भाग ले लेता हु।

रामू राजी हो जाता है दुसरे दिन से रामू भैस को चारा खिलाता है और श्यामू उसका दूध ले लेता और बैच आता था ।

मूर्ख भाई की कहानी पढ़ें हिंदी में

कुछ दिन हुआ तो रामू सोचा कि “मै रोज भैस को घास खिलाता हु लेकिन दूध तो श्यामू ले लेता है और मुझे देता भी नही है।”

यह सोच रामू अपने भाई श्यामू से कहता है

रामू :- भाई मैं तो रोज भैस को घास खिलाता हु लेकिन दूध तो तुम ले लेते हो मुझे कौन देगा ।

श्यामू :- तुम ये मत भूलो कि तुम भैस का आगे का भाग लिये हो तो तुम्हारा काम है भैस को घास खिलाना और मेरा पिछे का भाग है तो मेरा हक है दुध लेना ।

रामू दुसरे दिन से भैस को घास खिलाना ही बंद कर दिया । भैस भी दूध देना बंद कर दी ।

-श्यामू को दूध मिलना बंद हो गया । कुछ दिन मे भैस भी दुबली – पतली हो गयी।

श्यामू को यह अच्छा नही लग्त्त तो वह अपने भाई रामू से कहा

श्यामू :- क्यो रामू तुम भैस को घास क्यो नही देते हो ?

रामू :- क्या बताऊँ, भैस दूध ही नही देती है तो घास क्यो खिलाऊँ ।

श्यामू अपने गलती का माफी मांगता है और बोलता है एक दिन मै घास खिलाकर दूध निकालुंगा और एक दिन तुम घास खिलाकर दूध लेना । उसके बाद से दोनो अपने अपने समय पर भैस को खिलाने लगे और दूध निकालर बैचने लगे।

 

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मुर्ख जादुगरKahani Hindi

Jadui kahani

एक ॠषि नाम का जादुगर था जिसके आँखों मे जादू था ।

जादुगर जिसके भी आँख मे देखता वह जादुगर का गुलाम बन जाता था ।

ॠषि जादुगर एक मुर्ख और घमंडी जादुगर था । वह जहा जाता वहा पर के लोगो को अपना गुलाम बना लेता ।

ॠषि जादुगर शहर मे जादु करते वक्त पकड़ा गया था और सभी लोगो ने उसे खुब पीटा था ।

वह वहा से भागकर रमीपुर गांव आ गया था । गांव मे एक बड़ा सा बंगला दिखाई दिया ।

ॠषि जादुगर वहा पर गया और बंगला के मालिक को अपना गुलाम बना दिया ।

गांव मे दो स्त्री पानी भरने कुएँ के पास जा रही थी ।

ॠषि जादुगर उन्हे भी आँख मे जादु करके अपना गुलाम बना लिया । यह बात पुरे गांव मे फैल गयी ।

गांव मे हल्चल मच गयी । लोग घर से निकलना बंद कर दिये ।

मुर्ख जादुगर की कहानी पढ़ें हिंदी में

उसी गांव मे एक झोपड़ी मे एक महान जादुगर के पिता रहते थे ।

जब उन्हे इस बात के बारे मे पता चला तो वो अपने बेटे शक्ति को तुरंत फोन करके बुलाया ।

दुसरे दिन उनका शक्ति तुरंत गांव पहुँच गया ।

उसके पिता ॠषि जादुगर के अत्याचार के बारे मे बताया ।

शक्ति ने ॠषि जादुगर को रोकने के लिये उपाय सोचा और योजना बनाया ।

दुसरे दिन शक्ति आँख मे चस्मा लगाकर जाता है और काँच का

छोटा सा बॉक्स लेकर ॠषि जादुगर के बंगले मे पहुँच गया और देखा तो बहुत से लोग गुलाम बनकर काम कर रहे थे ।

शक्ति :- मै आपके लिये निलम से बना हीरा लाया हूँ और इसे मै आपको भेँट के रूप मे देना चाहता हु ।

ॠषि जादुगर :- दिखाओ कैसा हीरा है ।

शक्ति जैसे ही बॉक्स खोलता है । उसमे काँच होने से ॠषि जादुगर का

जादु काँच से परावर्तित होकर उसी के उपर असर कर देता है ।

ॠषि जादुगर वही बेहोश होकर गिर जाता है । शक्ति ॠषि जादुगर को रस्सी से बांध देता है ।

सभी गुलामो को पानी छिड़ककर वापस होश मे लाता है ।

शक्ति ॠषि जादुगर को पुलिस के हवाले कर देता है ।

इस प्रकार शक्ति गांव वालो को मुर्ख जादुगर से बचा लेता है ।

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1 thought on “Jadui Kahani”

  1. Hello,
    I read your all stories and I really like all of them. I also wrote some Jadui Stories. Like:- Elves Ki Jadui Kahani.
    Plz also read it. Comment what you feel about it.

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